अन्जान मैं खुदसे…

आज सुबह-सुबह मैंने आईना देखा…
उसमें जो अक्स था, वह कुछ अजनबी सा था।
सोचा भी न था कि कभी खुद से अजनबी हो जाएंगे,
कि खुद को पहचान न पाएंगे।
कुछ देर और खुद को निहारा, तो बचपन की तस्वीर नजर आई।
कहते हैं बचपन की यादें बहुत खूबसूरत होती हैं,
कि जब याद आएं तो आँखें भीग जाया करती हैं।
मेरे साथ ऐसा नहीं होता,
बहुत कम यादें हैं जो हैं।
फिर वापस वर्तमान में उसी आईने के सामने,
धीरे से जवानी उमड़ी,
इस उम्र में बहुत कुछ सीखा।

दुनिया की बुराई ने मेरी अच्छाई को काटने की कोशिश की,
कभी डर तो कभी आँसू,
फिर हौसला आया और अपने पैरों पर खड़ी हो गई।
अपने नाम से जानी जाऊँ, यह जिद थी।
फिर एक बार वर्तमान में उसी आईने के सामने,
शादी हो गई और ज़िन्दगी ने एक नया मोड़ ले लिया।
सर्नेम के साथ नाम भी बदल गया,
पते के साथ रोज़मर्रा की शख्सियत भी बदल गई,
मैं अच्छाई में बुराई और बुराई में अच्छाई बन गई,
दोगली जिंदगी में गुम हो गई,
खुद को ढूंढते ढूंढते खुद को खो दिया।
फिर से वर्तमान में उसी आईने में ,
उस अजनबी चेहरे में जानी-पहचानी सूरत ढूंढ रही हूं…


Until next time…

Your,
Janhavi


Comments

4 responses to “अन्जान मैं खुदसे…”

  1. Vishal sharma Avatar
    Vishal sharma

    Loved it ❤️

  2. Rimjhim Roy Avatar
    Rimjhim Roy

    Very beautiful❤

  3. Abhishek Mule Avatar
    Abhishek Mule

    Tooo good!!!

    1. thank you so much

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